Saturday, November 14, 2009

tasveer

तकता रहा सूनी दीवार को तनहा सा मैं  कल सारी  दोपहर,
सोचा की रंग दूं इस पर तेरा मुस्कुराता चेहरा,
फिर पूरी शाम सजाता रहा तेरे गले को छिड़कर बूंदे पानी की,
सुबह तक एक तस्वीर बन भी गयी थी..

आज फिर नापूंगा तेरी हंसी की गहरायी को...

1 comment:

DEEPANSHU GUPTA said...

Great bro... yaar tu to chhaa gaya hai... I always knew tum mera naam roshan karogey...