Saturday, November 21, 2009

keh doon kya aaj use ..


कह  दूं  क्या  आज  उसे ,
इसी  उल्झान  में  दिन  निकल  जाते  हैं ,
फिर  ढलती  शाम  में  हर  तरफ  अक्स  उसके  नज़र  आते  हैं ,
रात  गुजरती  है  जैसे  तैसे ,
और  फिर  नए  दिन में  तलाशते  हैं  नए  सवाल ,
कैसे  तुम  मुस्कुराती  आँखों  से  बिना  पूछे  हर  सवाल  का  जवाब  दे  जाते  हो ,
कल  सुबह  से  अलग  से  हैं  मिजाज ,
एक  फूल  तुझसे  टकरा  कर  गिरा  था  जो ,
वो  मुझे  मिल  जो  गया  है   ...

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