यूँ जब मुस्कुराती है हवा ,
तो गुदगुदी सी कानो में महसूस होती है ,
जैसे कभी में तेरी गोद में रख सर अपना सोया ,
और अपने बाल की एक लट से तूने फिर शरारत की हो ,
में तो यूँही बस गा रहा था ,
की ये बारिश भी साथ देने आ गयी ,
अच्छा ही हुआ ...,
कहीं वो एक आंसू दिख गया होता तो ...,
कोशिश भी की बहुत मगर मिला नहीं ,
वो तेरी तरह पराया जो गया था ...
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