न जा कहीं दर्द मेरे छोड़ कर मुझे ,
यूँ दिल अकेला रह न पायेगा ,
आदत हो गयी है तेरी तुझे क्या पता ,
बस एक पल और जी लूं तुझे ,
शायद चैन आये मुझे ...
क्यूँ नहीं सहमी सी आँखे अब ,
क्यूँ होठ मांगते नहीं दुआ ,
तड़पता क्यूँ नहीं अब जिन्दा एहसासों से ,
क्यूँ डर अब लगता नहीं ..
क्या दर्द मेरा मुझे बहका रहा ...
मांगी थी हर लम्हा दुआ ,
बस तेरे वास्ते खुदा से ,
लेकिन खो गया प्यार कहीं ,
और मेरे जीने का एहसास ,
तेरे खोने के ख्याल में ...
दूंदता रहा तुझे हर परछाई के पीछे ,
निचोड़ कर देखा इस दिल को भी ,
तेरे एक निशान के लिए ,
जला दिया हर एक याद को ,
रोशन करने के लिए जुदाई की रात को ,
थोड़ी पनाह तो मिली पर रहत नहीं ...
न जा कहीं दर्द मेरे छोड़ कर मुझे ,
यूँ दिल अकेला रह न पायेगा ,
तेरे हर ख्याल पे लिखी थी रुबाई मैंने ,
पर रंग उसमे नहीं थे ,कशिश भी नहीं ,
बना कर खुद को कलम डुबाया दर्द में ,
तो हर लब्ज़ नज़्म बन गया ,
न जा कहीं दर्द मेरे छोड़ कर मुझे ,
यूँ दिल अकेला रह न पायेगा ,
अभी होश मेरा मरा नहीं ,
जिंदा है पहरे में , तेरी याद के ...
बस न जा कहीं दर्द मेरे छोड़ कर मुझे ,
यूँ दिल अकेला रह न पायेगा ..
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