Wednesday, July 7, 2010

Itefaq aur shaam ...

दीवाने की किस्मत तो देखो ,
बस लिखा है उसमे इंतज़ार ,
दिल को मालूम है , फिर भी दुआ करता है ,
पर इस दुनिया में इतफाक रोज नहीं हुआ करता है ...


***

गुमसुम सी धड़कन कुछ तो दे रही थी पैगाम ,
और बहुत कुछ था बिखरा हुआ रोज की तरह ,
न जाने क्यूँ फिर लिया तेरा नाम ,
और हर बार की तरह मुकम्मल हो गयी मेरी शाम ...

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